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एनिमिया क्या है ? ,प्रकार ,कारण ,लक्षण, और उपचार कैसे करे

 एनिमिया क्या है ?




एनिमिया (Anemia) एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर में रेड ब्लड सेल्स (लाल रक्त कण) या हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है। हीमोग्लोबिन वह प्रोटीन है जो ऑक्सीजन को शरीर के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाने का काम करता है। जब इस प्रोटीन की कमी होती है, तो शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाता, जिसके कारण थकान, कमजोरी, चक्कर आना और सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

 एनिमिया के प्रकार -

एनिमिया (Anemia) का मतलब है रक्त में हीमोग्लोबिन या रेड ब्लड सेल्स की कमी होना। इसके कई प्रकार होते हैं, जिनमें प्रमुख हैं:

1. आयरन डिफिशिएंसी एनिमिया (Iron Deficiency Anemia): यह तब होता है जब शरीर में आयरन की कमी होती है, जो कि हीमोग्लोबिन बनाने के लिए जरूरी होता है।

2. विटामिन B12 डिफिशिएंसी एनिमिया (Vitamin B12 Deficiency Anemia): जब शरीर में विटामिन B12 की कमी होती है, तो यह एनिमिया का कारण बन सकता है। यह विटामिन रक्त कोशिकाओं के निर्माण के लिए आवश्यक है। 

3. फोलिक एसिड डिफिशिएंसी एनिमिया (Folic Acid Deficiency Anemia): फोलिक एसिड की कमी के कारण भी एनिमिया हो सकता है, क्योंकि यह नई रक्त कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है। 

4. एप्लास्टिक एनिमिया (Aplastic Anemia): इसमें हड्डी के मज्जा (bone marrow) में रक्त कोशिकाओं का निर्माण रुक जाता है, जिससे एनिमिया होता है।

5. हिमोलिटिक एनिमिया (Hemolytic Anemia): इसमें रक्त कोशिकाओं का असामान्य रूप से जल्दी नष्ट होना शुरू हो जाता है, जिससे एनिमिया की स्थिति उत्पन्न होती है।

6.सिकल सेल एनिमिया (Sickle Cell Anemia): यह एक आनुवंशिक रोग है जिसमें रक्त कोशिकाएँ सामान्य रूप से आकार में नहीं होतीं, जिससे रक्त प्रवाह में बाधा उत्पन्न होती है।

7.थैलेसीमिया (Thalassemia): यह एक आनुवंशिक विकार है जिसमें रक्त कोशिकाओं का उत्पादन सामान्य से कम होता है और वे जल्दी नष्ट हो जाती हैं।

इनमें से प्रत्येक प्रकार का इलाज और प्रबंधन विभिन्न होता है, और यह व्यक्ति की स्थिति और कारण पर निर्भर करता है।

 

एनिमिया के  कारण :-

एनीमिया के कई कारण हो सकते हैं। प्रमुख कारणों में शामिल
 हैं :

1. आयरन की कमी :  सबसे सामान्य कारण है, जब शरीर को पर्याप्त आयरन नहीं मिलता, तो लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में कमी आती है।

2. विटामिन B12 और फोलेट की कमी : इन विटामिनों की कमी से भी रक्त कोशिकाओं का उत्पादन प्रभावित होता है, जिससे एनीमिया हो सकता है।

3. गंभीर रक्तस्राव : जैसे अत्यधिक मासिक धर्म, आंतों से रक्तस्राव, या किसी दुर्घटना में रक्त की हानि होने से एनीमिया हो सकता है।

4. हड्डियों के रोग : जैसे हड्डियों का संक्रमण या कैंसर के कारण शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं का उत्पादन कम हो सकता है।

5. किडनी रोग : किडनी की समस्या से शरीर में रक्त कोशिकाओं के निर्माण में कमी हो सकती है, जिससे एनीमिया होता है।

6. आटोइम्यून विकार : जैसे कि शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र खुद ही रक्त कोशिकाओं पर हमला करता है, जिससे एनीमिया हो सकता है।

7. जेनेटिक विकार : सिकल सेल एनीमिया या थैलेसीमिया जैसे विकारों में रक्त कोशिकाओं का निर्माण और कार्य प्रभावित होता है।

8. पोषण की कमी : पर्याप्त आहार न मिलने से शरीर को आवश्यक पोषक तत्व नहीं मिलते, जिससे एनीमिया हो सकता है।

इन कारणों के आधार पर, एनीमिया का इलाज और उपचार अलग-अलग हो सकता है।
एनिमिया का इलाज इसके कारण पर निर्भर करता है। सामान्यत: आयरन, विटामिन B12, और फोलिक एसिड की गोलियाँ दी जाती हैं, और कभी-कभी ब्लड ट्रांसफ्यूजन की भी जरूरत पड़ सकती है।

एनिमिया के लक्षण -


एनिमिया के लक्षण अक्सर हल्के से लेकर गंभीर हो सकते हैं, और ये व्यक्ति की स्थिति और एनिमिया के प्रकार पर निर्भर करते हैं। आमतौर पर, निम्नलिखित लक्षण पाए जा सकते हैं:

1. थकान और कमजोरी – शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे निरंतर थकान और कमजोरी महसूस होती है।

2. पीलापन – त्वचा का रंग हल्का या पीला पड़ सकता है।

3. सांस फूलना – हल्की शारीरिक गतिविधि करते समय भी सांस लेने में दिक्कत हो सकती है।

4. चक्कर आना – रक्त संचार की कमी के कारण चक्कर आ सकते हैं।

5. दिल की धड़कन तेज होना – शरीर में ऑक्सीजन की कमी के कारण दिल की धड़कन बढ़ सकती है।

6. सिरदर्द – रक्त की कमी के कारण सिर में दर्द या दबाव महसूस हो सकता है।

7. हाथ-पैरों में ठंडक – शरीर के अंगों में रक्त संचार कम होने के कारण ठंडापन महसूस हो सकता है।

8. बालों का झड़ना और त्वचा का सूखना – शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने से बाल झड़ सकते हैं और त्वचा सूखी हो सकती है।

9. धुंधला दिखाई देना – कभी-कभी आंखों के सामने धुंधलापन या नजर में गड़बड़ी हो सकती है।

अगर आपको इन लक्षणों में से कोई भी महसूस हो, तो चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है, ताकि सही कारण का पता चल सके और उचित उपचार मिल सके।

एनीमिया विकसित होने का खतरा किसमें अधिक होता है?

एनीमिया विकसित होने का खतरा कुछ विशेष समूहों में अधिक होता है, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:


1. महिलाएं : खासकर मासिक धर्म के दौरान खून की कमी, गर्भावस्था और प्रसव के बाद एनीमिया का खतरा बढ़ सकता है।

2. बच्चे और किशोर : विकास के दौर में शरीर को अधिक पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। अगर आहार में आयरन की कमी हो, तो एनीमिया हो सकता है।

3. वृद्ध लोग : उम्र बढ़ने के साथ पोषक तत्वों का अवशोषण कम हो सकता है, जिससे एनीमिया का खतरा बढ़ता है।

4. वेजिटेरियन और वेगन लोग : अगर उनका आहार आयरन, विटामिन बी12 और फोलिक एसिड से कम होता है, तो एनीमिया का जोखिम बढ़ सकता है।

5. चिंताजनक या क्रोनिक बीमारियों वाले लोग : जैसे किडनी रोग, कैंसर, और हृदय रोग वाले लोग अधिक प्रभावित हो सकते हैं।

6. लोहे की कमी वाले लोग : जिनमें आयरन की कमी होती है, वे अधिकतर एनीमिया का शिकार होते हैं।

7. दवाइयों के कारण : कुछ दवाइयां, जैसे कि एंटासिड्स और अन्य दवाइयां, शरीर में आयरन की अवशोषण क्षमता को कम कर सकती हैं।


अगर किसी को एनीमिया के लक्षण जैसे थकावट, कमजोरी, त्वचा का पीला पड़ना आदि महसूस हों, तो उसे चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

 

एनीमिया की जाँच कैसे की जाती है ?


एनीमिया की जांच आमतौर पर खून की जांच से की जाती है। सबसे सामान्य परीक्षण जो किया जाता है, वह है 
हेमोग्लोबिन स्तर की जांच। इसके अलावा, कुछ अन्य परीक्षण भी किए जा सकते हैं, जैसे:

1. CBC (Complete Blood Count) - यह खून के विभिन्न तत्वों की संख्या को मापता है, जैसे कि लाल रक्त कण (Red Blood Cells), हेमोग्लोबिन, और हेमाटोक्रिट। इससे एनीमिया के प्रकार का पता चल सकता है।

   

2. MCV (Mean Corpuscular Volume) - यह जांच लाल रक्त कणों के आकार को मापती है और यह बताती है कि एनीमिया माइक्रोसाइटिक (छोटे रक्त कण) है या मेगालोब्लास्टिक (बड़े रक्त कण)।


3. Serum Iron, Ferritin, and Total Iron Binding Capacity (TIBC) - यह जांच यह पता लगाने के लिए की जाती है कि शरीर में आयरन की कमी तो नहीं है, जो कि एनीमिया का एक सामान्य कारण हो सकता है।


4. Vitamin B12 और Folate Levels - यदि एनीमिया विटामिन की कमी से हो रहा है, तो ये टेस्ट किए जा सकते हैं।


5. Reticulocyte Count  - यह जांच यह बताती है कि शरीर में नए रक्त कणों का उत्पादन कितना हो रहा है।


इन जांचों के आधार पर डॉक्टर एनीमिया के कारण और प्रकार का पता लगाते हैं और उसके अनुसार इलाज निर्धारित करते हैं।

एनिमिया का उपचार -


एनीमिया का उपचार इसके प्रकार और कारण पर निर्भर करता है। विभिन्न प्रकार के एनीमिया के उपचार में निम्नलिखित तरीके शामिल हो सकते हैं:

1. आयरन डिफिशिएंसी एनीमिया :

• आयरन सप्लीमेंट्स : डॉक्टर आयरन की गोलियाँ या सिरप लिख सकते हैं, ताकि शरीर में आयरन की कमी को पूरा किया जा सके।

   •आयरन युक्त आहार : जैसे पालक, शकरकंद, मांस, दालें, और अनाज।

   • विटामिन C : आयरन के अवशोषण को बेहतर बनाने के लिए विटामिन C की खपत भी बढ़ानी चाहिए, जैसे कि संतरा, नींबू, या टमाटर।


2. विटामिन B12 और फोलिक एसिड की कमी से होने वाला एनीमिया :

   • विटामिन B12 और फोलिक एसिड सप्लीमेंट्स : बी12 की कमी को पूरा करने के लिए इंजेक्शन या गोलियाँ दी जाती हैं।

   • फोलिक एसिड युक्त आहार : जैसे कि हरी पत्तेदार सब्जियाँ, केले, और दालें।

   

3. हिमोलिटिक एनीमिया :

   • इम्यून-सुप्रेसिव दवाएँ : यदि यह इम्यून प्रणाली के कारण हो रहा है, तो दवाएँ दी जा सकती हैं जो इम्यून प्रतिक्रिया को नियंत्रित करती हैं।

   • ब्लड ट्रांसफ्यूजन : गंभीर मामलों में, रक्त का संचरण किया जा सकता है।

   • कोर्टिकोस्टेरॉयड्स : सूजन और रक्त कोशिकाओं के नुकसान को कम करने के लिए दिए जा सकते हैं।


4. अस्थि मज्जा संबंधी एनीमिया :

   • हड्डी मज्जा (Bone Marrow) स्टिमुलेटिंग एजेंट्स : जैसे एरिथ्रोपोएटिन, जो अस्थि मज्जा को रक्त कोशिकाएँ बनाने के लिए उत्तेजित करता है।

   • रक्त ट्रांसफ्यूजन : यदि स्थिति गंभीर है तो रक्त का संचरण किया जा सकता है।

   • हड्डी मज्जा प्रत्यारोपण : यदि यह स्थिति गंभीर हो और अन्य उपचारों से नियंत्रण में न आए, तो हड्डी मज्जा का प्रत्यारोपण किया जा सकता है।

5. सिकल सेल एनीमिया :

   • पेनिसिलिन : संक्रमण से बचाव के लिए दिया जाता है।

   • हाइड्रोक्सीयूरिया : यह दवा सिकल सेल एनीमिया के लक्षणों को कम कर सकती है।

   • ब्लड ट्रांसफ्यूजन : रक्त की कमी को पूरा करने के लिए।

   • हड्डी मज्जा प्रत्यारोपण : कुछ मामलों में इसका भी विचार किया जाता है।

6. पैरेलल एनीमिया :

    • विटामिन B12 इंजेक्शन : बी12 की कमी को पूरा करने के लिए यह दिया जाता है।

   • लाइफटाइम बी12 सप्लीमेंटेशन : एक बार उपचार शुरू होने के बाद, कुछ लोगों को जीवनभर विटामिन B12 की आपूर्ति करनी पड़ती है।


7. क्रोनिक रोगों से संबंधित एनीमिया :

   • बीमारी का उपचार : जब मुख्य बीमारी जैसे किडनी रोग या कैंसर का इलाज किया जाता है, तो एनीमिया भी सुधार सकता है।

   • एरिथ्रोपोएटिन स्टिमुलेटर्स : कुछ मामलों में, एरिथ्रोपोएटिन (एक हार्मोन जो लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को उत्तेजित करता है) की मदद से एनीमिया का इलाज किया जाता है।


     आहार और जीवनशैली में बदलाव :  

• स्वस्थ आहार और उचित पोषण एनीमिया को प्रबंधित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।  

• कुछ मामलों में, डॉक्टर रक्तदान (ब्लड डोनेशन) के लिए भी सलाह दे सकते हैं।  

उपचार की सही योजना और दवाएँ डॉक्टर द्वारा एनीमिया के प्रकार और गंभीरता के आधार पर निर्धारित की जाती हैं।

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